श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 143
 
 
श्लोक  4.13.143 
एतावन्मात्रमप्यशेषराष्ट्रोपकारि धारयितुं न शक्नोति भवान‍्मन्यत इत्यात्मना न चोदितवान‍्॥ १४३॥
 
 
अनुवाद
प्रभु ने सोचा कि सम्पूर्ण राष्ट्र का यह उपकारक इतना छोटा-सा भार भी नहीं उठा सकता, इसीलिए मैंने स्वयं आपसे यह बात नहीं कही।
 
The Lord thought that this benefactor of the entire nation cannot bear even such a small burden, that is why I did not tell you myself. 143.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)