श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 142
 
 
श्लोक  4.13.142 
तस्य च धारणक्लेशेनाहमशेषोपभोगेष्वसङ्गिमानसो न वेद्मि स्वसुखकलामपि॥ १४२॥
 
 
अनुवाद
उसके जागरणके दुःखसे और सम्पूर्ण सुखोंसे विरक्त होनेके कारण मुझे किंचितमात्र भी सुख नहीं मिला ॥142॥
 
Because of the pain of its vigilance and being disinterested in all pleasures I did not get even the slightest pleasure. ॥ 142॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)