श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  4.13.141 
भगवन्ममैतत्स्यमन्तकरत्नं शतधनुषा समर्पितमपगते च तस्मिन्नद्य श्व: परश्वो वा भगवान‍्याचयिष्यतीति कृतमतिरतिकृच्छ्रेणैतावन्तं कालमधारयम्॥ १४१॥
 
 
अनुवाद
"प्रभो! शतधन्वा ने वह मणि मुझे सौंप दी थी। उसकी मृत्यु के पश्चात् मैंने उसे बड़ी कठिनाई से इतने दिनों तक अपने पास रखा है, यह सोचकर कि भगवान आज, कल या परसों मुझसे मांग लेंगे। 141.
 
"Lord! Shatdhanva had handed over that gem to me. After his death, I have kept it with me with great difficulty for so many days, thinking that God will ask for it today, tomorrow or the day after. 141.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)