श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  4.13.138 
तत्र चोपविष्टेष्वखिलेषु यदुषु पूर्वं प्रयोजनमुपन्यस्य पर्यवसित च तस्मिन‍् प्रसंगान्तरपरिहास-कथामक्रूरेण कृत्वा जनार्दनस्तमक्रूरमाह॥ १३८॥
 
 
अनुवाद
जब सब यदुवंशी वहाँ आकर बैठ गए और पहला प्रयोजन समझाया गया तथा उसका निष्कर्ष निकाला गया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अक्रूरजी के साथ विनोद करते हुए उनसे कहा-॥138॥
 
After all the Yaduvanshis had come and sat there, and the first purpose was explained and its conclusion was concluded, then Lord Krishna, while joking with Akrura, said to them -॥ 138॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)