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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा
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श्लोक 114
श्लोक
4.13.114
किमिदमेकदैव प्रचुरोपद्रवागमनमेतदालोच्यतामित्युक्तेऽन्धकनामा यदुवृद्ध: प्राह॥ ११४॥
अनुवाद
इतने सारे संकट एक साथ क्यों आ गए हैं? इस पर विचार करना चाहिए।’ उनके ऐसा कहने पर अंधक नामक एक वृद्ध यादव ने कहा- ॥114॥
What is the reason that so many troubles have come together? This should be considered.' On his saying this, an old Yadava named Andhaka said - ॥114॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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