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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा
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श्लोक 112
श्लोक
4.13.112
तदपक्रान्तिदिनादारभ्य तत्रोपसर्गदुर्भिक्षव्यालानावृष्टिमारिकाद्युपद्रवा बभूवु:॥ ११२॥
अनुवाद
उनके जाते ही उसी दिन से द्वारका में रोग, दुर्भिक्ष, सर्पभय, अनावृष्टि और महामारी आदि संकट आने लगे ॥112॥
As soon as he left, from that very day Dwarka started facing troubles like diseases, famine, snake infestation, drought and pestilence. ॥ 112॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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