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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा
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श्लोक 110
श्लोक
4.13.110
द्विषष्टिवर्षाण्येवं तन्मणिप्रभावात्तत्रोपसर्गदुर्भिक्षमारिकामरणादिकं नाभूत्॥ ११०॥
अनुवाद
उस मणि के प्रभाव से द्वारका में बासठ वर्ष तक कोई रोग, दुर्भिक्ष, महामारी या मृत्यु आदि नहीं हुई ॥110॥
Due to the influence of that gem, there was no disease, famine, epidemic or death etc. in Dwarka for sixty-two years. 110॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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