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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा
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श्लोक 105
श्लोक
4.13.105
वासुदेवोऽपि द्वारकामाजगाम॥ १०५॥
अनुवाद
इधर भगवान वासुदेव द्वारिका पधारे। 105॥
Here Lord Vasudev came to Dwarka. 105॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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