श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  4.13.103 
जनकराजश्चार्घ्यपूर्वकमेनं गृहं प्रवेशयामास॥ १०३॥ स तत्रैव च तस्थौ॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
विदेहनगर पहुँचने पर राजा जनक ने उन्हें प्रणाम किया और अपने घर ले आये और वहीं रहने लगे ॥103-104॥
 
On reaching Videhanagar, King Janaka offered him obeisance and brought him to his home and he started living there.॥103-104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)