vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 4: चतुर्थ अंश
»
अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा
»
श्लोक 103
श्लोक
4.13.103
जनकराजश्चार्घ्यपूर्वकमेनं गृहं प्रवेशयामास॥ १०३॥ स तत्रैव च तस्थौ॥ १०४॥
अनुवाद
विदेहनगर पहुँचने पर राजा जनक ने उन्हें प्रणाम किया और अपने घर ले आये और वहीं रहने लगे ॥103-104॥
On reaching Videhanagar, King Janaka offered him obeisance and brought him to his home and he started living there.॥103-104॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×