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vishnu 4.12.33: तदनन्तर पुत्र-गुणों से युक्त उस अत्यन्त शुद्ध लग्न होरांशक अंश के समय में पुत्र-जन्म के विषय में हुई बातचीत के प्रभाव से शैव्या गर्भ धारण करने की स्थिति में न होने पर भी कुछ ही दिनों में गर्भवती हो गई और समय पर पुत्र का जन्म हुआ ॥33-34॥   |   vishnu अध्याय 4.12: यदुपुत्र क्रोष्टुका वंश   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 12: यदुपुत्र क्रोष्टुका वंश  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  4.12.33 
अनन्तरं चातिशुद्धलग्नहोरांशकावयवोक्तकृतपुत्रजन्मलाभगुणाद्वयस: परिणाममुपगतापि शैव्या स्वल्पैरेवाहोभिर्गर्भमवाप॥ ३३॥ कालेन च कुमारमजीजनत्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर पुत्र-गुणों से युक्त उस अत्यन्त शुद्ध लग्न होरांशक अंश के समय में पुत्र-जन्म के विषय में हुई बातचीत के प्रभाव से शैव्या गर्भ धारण करने की स्थिति में न होने पर भी कुछ ही दिनों में गर्भवती हो गई और समय पर पुत्र का जन्म हुआ ॥33-34॥
 
Subsequently, due to the influence of the conversation about the birth of a son during the time of that very pure lagna horanshak component having the qualities of having a son, Shaivya became pregnant within a few days even though she was not in a condition to conceive and a son was born at the right time. 33-34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)