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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 12: यदुपुत्र क्रोष्टुका वंश
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श्लोक 25
श्लोक
4.12.25
सा चावलोक्य राज्ञ: सव्यपार्श्ववर्त्तिनीं कन्यामीषदुद्भूतामर्षस्फुरदधरपल्लवा राजानमवोचत्॥ २५॥
अनुवाद
राजा के बाईं ओर राजकुमारी को बैठी देखकर क्रोध से काँपते हुए होंठ बोले-॥25॥
Seeing the princess sitting on the king's left side he said with his lips trembling with anger -॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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