श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 11: यदुवंशका वर्णन और सहस्रार्जुनका चरित्र  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.11.8 
हैहयपुत्रो धर्मस्तस्यापि धर्मनेत्रस्तत: कुन्ति: कुन्ते: सहजित्॥ ८॥ तत्तनयो महिष्मान् योऽसौ माहिष्मतीं पुरीं निवासयामास॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हैहय का पुत्र धर्म था, धर्म का धर्मनेत्र था, धर्मनेत्र का कुंती था, कुंतिका का सहजित था और सहजित का पुत्र महिष्मान था, जिसने महिष्मतिपुरी की स्थापना की। 8-9॥
 
Haihaya's son was Dharma, Dharma's was Dharmanetra, Dharmanetra's was Kunti, Kuntika was Sahajit and Sahajit's son was Mahishmaan, who established Mahishmatipuri. 8-9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)