| श्री विष्णु पुराण » अंश 4: चतुर्थ अंश » अध्याय 1: वैवस्वतमनुके वंशका विवरण » श्लोक 90 |
|
| | | | श्लोक 4.1.90  | यस्मिञ्जगद्यो जगदेतदाद्यो
यश्चाश्रितोऽस्मिञ्जगति स्वयम्भू:।
ससर्वभूतप्रभवो धरित्र्यां
स्वांशेन विष्णुर्नृपतेऽवतीर्ण:॥ ९०॥ | | | | | | अनुवाद | | जिनमें यह जगत् स्थित है, जो आदिपुरुष विश्वरूप हैं और इस जगत् के आश्रित एवं स्वयंभू हैं, हे नृपते! वे समस्त प्राणियों के मूलरूप भगवान् विष्णु अपने अंश से पृथ्वी पर अवतरित हुए हैं॥90॥ | | | | In whom this world is situated, who is the Adipurush world-form and is dependent and self-sufficient of this world, O Nripate! That Vishnu, the origin of all the beings, has incarnated from his part on the earth. 90॥ | |
| | ✨ ai-generated | | |
|
|