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श्लोक 4.1.75  |
| बहूनि तवात्रैव गान्धर्वं शृण्वतश्चतुर्युगान्यतीतानि॥ ७५॥ |
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| अनुवाद |
| क्योंकि तुमने गंधर्वों के गीत सुनते हुए अनेक चतुर्युग यहाँ बिताए हैं। |
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| Because you have spent many Chaturyugas here listening to the songs of the Gandharvas. 75. |
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