श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 9: ब्रह्मचर्य आदि आश्रमोंका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.9.30 
काम: क्रोधस्तथा दर्पमोहलोभादयश्च ये।
तांस्तु सर्वान‍्परित्यज्य परिव्राड् निर्ममो भवेत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
घुमक्कड़ को काम, क्रोध, मान, लोभ, मोह आदि सब दुर्गुणों का त्याग कर देना चाहिए और आसक्ति रहित होकर रहना चाहिए ॥30॥
 
A nomad should give up all vices such as lust, anger, pride, greed, infatuation, etc. and live without attachment. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)