श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 9: ब्रह्मचर्य आदि आश्रमोंका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.9.22 
वन्यस्नेहेन गात्राणामभ्यंगश्चास्य शस्यते।
तपश्च तस्य राजेन्द्र शीतोष्णादिसहिष्णुता॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे राजेन्द्र! शरीर पर जंगली तेल मलना, शीत सहन करना तथा तपस्या में लगे रहना, यही उसके शुभ कर्म हैं॥22॥
 
Hey Rajendra! Rubbing wild oils on his body and enduring the cold and being engaged in penance are his auspicious deeds. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)