श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 9: ब्रह्मचर्य आदि आश्रमोंका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.9.17 
यस्तु सम्यक्‍करोत्येवं गृहस्थ: परमं विधिम्।
सर्वबन्धविनिर्मुक्तो लोकानाप्नोत्यनुत्तमान्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जो गृहस्थ अपने परम कर्तव्य का पूर्णतः पालन करता है, वह समस्त बंधनों से मुक्त होकर परम लोक को प्राप्त करता है ॥17॥
 
In this manner a householder who follows his supreme duty completely, becomes free from all bondages and attains the highest of worlds. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)