vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 9: ब्रह्मचर्य आदि आश्रमोंका वर्णन
»
श्लोक 17
श्लोक
3.9.17
यस्तु सम्यक्करोत्येवं गृहस्थ: परमं विधिम्।
सर्वबन्धविनिर्मुक्तो लोकानाप्नोत्यनुत्तमान्॥ १७॥
अनुवाद
इस प्रकार जो गृहस्थ अपने परम कर्तव्य का पूर्णतः पालन करता है, वह समस्त बंधनों से मुक्त होकर परम लोक को प्राप्त करता है ॥17॥
In this manner a householder who follows his supreme duty completely, becomes free from all bondages and attains the highest of worlds. ॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×