श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 9: ब्रह्मचर्य आदि आश्रमोंका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.9.13 
अनिकेता ह्यनाहारा यत्र सायंगृहाश्च ये।
तेषां गृहस्थ: सर्वेषां प्रतिष्ठा योनिरेव च॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जिनका कोई निश्चित घर या भोजन की व्यवस्था नहीं है और जो जहाँ शाम हो जाती है, वहीं रह जाते हैं, उन सबका आधार और मूल गृहस्थाश्रम ही है ॥13॥
 
Of those who have no fixed home or food arrangement and who stay wherever the evening falls, the basis and root of all of them is the grihasthashram. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)