श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.8.7 
यद्यदिच्छति यावच्च फलमाराधितेऽच्युते।
तत्तदाप्नोति राजेन्द्र भूरि स्वल्पमथापि वा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जो भी फल वह चाहता है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, वह श्री अच्युत की पूजा करके अवश्य प्राप्त कर लेता है। ॥7॥
 
O King! Whatever fruits he desires, be it small or large, he certainly obtains them all by worshipping Sri Achyuta. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)