vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 8: विष्णु भगवान्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन
»
श्लोक 7
श्लोक
3.8.7
यद्यदिच्छति यावच्च फलमाराधितेऽच्युते।
तत्तदाप्नोति राजेन्द्र भूरि स्वल्पमथापि वा॥ ७॥
अनुवाद
हे राजन! जो भी फल वह चाहता है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, वह श्री अच्युत की पूजा करके अवश्य प्राप्त कर लेता है। ॥7॥
O King! Whatever fruits he desires, be it small or large, he certainly obtains them all by worshipping Sri Achyuta. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×