श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.8.6 
और्व उवाच
भौमं मनोरथं स्वर्गं स्वर्गे रम्यं च यत्पदम्।
प्राप्नोत्याराधिते विष्णौ निर्वाणमपि चोत्तमम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
और्व ने कहा - भगवान विष्णु की आराधना करके मनुष्य पृथ्वी, स्वर्ग, स्वर्ग से भी उत्तम ब्रह्मपद तथा परम निर्वाण पद से संबंधित समस्त कामनाओं को प्राप्त कर लेता है॥6॥
 
Aurav said - By worshiping Lord Vishnu, man attains all the desires related to the earth, heaven, the state of Brahma which is better than heaven and also the state of ultimate nirvana. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)