श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.8.41 
इत्येते कथिता राजन‍्वर्णधर्मा मया तव।
धर्मानाश्रमिणां सम्यग्ब्रुवतो मे निशामय॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इस प्रकार मैंने तुमसे वर्णधर्म का वर्णन किया; अब मैं आश्रमधर्म का वर्णन करूँगा; ध्यानपूर्वक सुनो॥41॥
 
O King, I have thus described to you the Varnadharma (characteristics of the Varnas); now I shall describe the Ashramadharma further; listen carefully. ॥ 41॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे तृतीयेंऽशे अष्टमोऽध्याय:॥ ८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)