श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.8.25 
ग्राव्णि रत्ने च पारक्ये समबुद्धिर्भवेद् द्विज:।
ऋतावभिगम: पत्न्यां शस्यते चास्य पार्थिव॥ २५॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण को रत्नों तथा अन्य रत्नों के सम्बन्ध में समान रूप से बुद्धिमान होना चाहिए। हे राजन! अपनी पत्नी के साथ रजस्वला होना ब्राह्मण के लिए प्रशंसनीय कार्य है। 25.
 
A Brahmin should be equally intelligent when it comes to stones and other people's gems. O King! Being in the state of menstruation with respect to one's wife is a praiseworthy act for a Brahmin. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)