श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.8.22 
दानं दद्याद्यजेद्देवान‍्यज्ञैस्स्वाध्यायतत्पर:।
नित्योदकी भवेद्विप्र: कुर्याच्चाग्निपरिग्रहम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
दान देना, यज्ञों द्वारा देवताओं की पूजा करना, स्वाध्याय करना, प्रतिदिन स्नान करना और अग्नि प्रज्वलित करना आदि कर्म करना ब्राह्मण का कर्तव्य है। 22॥
 
It is the duty of a Brahmin to give charity, worship the gods through yagyas, be self-study, take daily bath and perform rituals like lighting of fire etc. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)