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vishnu 3.8.16: हे नरेश्वर! जो पुरुष देवताओं, ब्राह्मणों और गुरुजनों की सेवा में सदैव तत्पर रहता है, उस पर गोविंद सदैव प्रसन्न रहते हैं॥16॥   |   vishnu अध्याय 3.8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन   ।   vishnu अंश 3: तृतीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.8.16 
देवद्विजगुरूणां च शुश्रूषासु सदोद्यत:।
तोष्यते तेन गोविन्द: पुरुषेण नरेश्वर॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे नरेश्वर! जो पुरुष देवताओं, ब्राह्मणों और गुरुजनों की सेवा में सदैव तत्पर रहता है, उस पर गोविंद सदैव प्रसन्न रहते हैं॥16॥
 
The one who is always ready to serve the male gods, brahmins and teachers, O Nareshwar! Govind is always happy with that. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)