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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 8: विष्णु भगवान्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन
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श्लोक 14
श्लोक
3.8.14
परदारपरद्रव्यपरहिंसासु यो रतिम्।
न करोति पुमान्भूप तोष्यते तेन केशव:॥ १४॥
अनुवाद
हे राजन! जो मनुष्य पराई स्त्री, धन और हिंसा में रुचि नहीं रखता, उस पर भगवान केशव सदैव प्रसन्न रहते हैं। ॥14॥
O King, Lord Kesava is always pleased with the man who is not interested in other's women, wealth and violence. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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