श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.8.12 
ब्राह्मण: क्षत्रियो वैश्य: शूद्रश्च पृथिवीपते।
स्वधर्मतत्परो विष्णुमाराधयति नान्यथा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वी के स्वामी! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र अपने-अपने धर्मानुसार भगवान विष्णु की ही पूजा करते हैं, अन्य किसी प्रकार से नहीं।॥12॥
 
O Lord of the Earth! The Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras worship Vishnu only by following their respective religious principles and not in any other way.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)