श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 7: यमगीता  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.7.4 
अंगुलस्याष्टभागोऽपि न सोऽस्ति मुनिसत्तम।
न सन्ति प्राणिनो यत्र कर्मबन्धनिबन्धना:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे मुनियों में श्रेष्ठ! ऐसी आठवाँ भाग भूमि भी नहीं है जहाँ कर्मबन्धन से बंधे हुए प्राणी निवास न करते हों॥4॥
 
O best of sages! There is not even one-eighth of an inch of land where beings bound by the bondage of karma do not reside. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)