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vishnu 3.7.29: जो दुष्ट बुद्धि का स्वामी है, दूसरों का तेज नहीं देख सकता, दूसरों की निन्दा करता है, संतों को कष्ट पहुँचाता है और जो धनवान होने पर भी भगवान विष्णु का पूजन नहीं करता और न दान देता है; उस दुष्ट के हृदय में श्री जनार्दन कभी निवास नहीं कर सकते॥ 29॥   |   vishnu अध्याय 3.7: यमगीता   ।   vishnu अंश 3: तृतीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 7: यमगीता  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.7.29 
न सहति परसम्पदं विनिन्दां
कलुषमति: कुरुते सतामसाधु:।
न यजति न ददाति यश्च सन्तं
मनसि न तस्य जनार्दनोऽधमस्य॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो दुष्ट बुद्धि का स्वामी है, दूसरों का तेज नहीं देख सकता, दूसरों की निन्दा करता है, संतों को कष्ट पहुँचाता है और जो धनवान होने पर भी भगवान विष्णु का पूजन नहीं करता और न दान देता है; उस दुष्ट के हृदय में श्री जनार्दन कभी निवास नहीं कर सकते॥ 29॥
 
One who has an evil mind and cannot see the splendor of others, who criticizes others, who harms the saints and who [despite being wealthy] neither worships Lord Vishnu nor gives charity [to His devotees]; in the heart of that wretched person, Sri Janardana can never reside.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)