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vishnu 3.7.12-13: एक दिन मैंने उस कलिंग ब्राह्मण से वही प्रश्न पूछा जो तुम मुझसे पूछ रहे हो। उस समय उसने उस ऋषि के वचनों को स्मरण करके कहा कि उस जातिस्मर ब्राह्मण ने यमराज और उनके दूतों के मध्य हुए वार्तालाप का गूढ़ रहस्य मुझसे कहा था। मैं वही तुमसे कह रहा हूँ॥12-13॥   |   vishnu अध्याय 3.7: यमगीता   ।   vishnu अंश 3: तृतीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 7: यमगीता  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  3.7.12-13 
एकदा तु मया पृष्टमेतद्यद्भवतोदितम्।
प्राह कालिङ्गको विप्रस्स्मृत्वा तस्य मुनेर्वच:॥ १२॥
जातिस्मरेण कथितो रहस्य: परमो मम।
यमकिङ्करयोर्योऽभूत्संवादस्तं ब्रवीमि ते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
एक दिन मैंने उस कलिंग ब्राह्मण से वही प्रश्न पूछा जो तुम मुझसे पूछ रहे हो। उस समय उसने उस ऋषि के वचनों को स्मरण करके कहा कि उस जातिस्मर ब्राह्मण ने यमराज और उनके दूतों के मध्य हुए वार्तालाप का गूढ़ रहस्य मुझसे कहा था। मैं वही तुमसे कह रहा हूँ॥12-13॥
 
One day, I asked the same question that you are asking me from that Kalinga Brahmin. At that time he remembered the words of that sage and said that that Jatismar Brahmin had told me the deep secret of the conversation that took place between Yamraj and his messengers. I am telling you the same.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)