श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 6: सामवेदकी शाखा, अठारह पुराण और चौदह विद्याओंके विभागका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.6.9 
अथर्ववेदं स मुनिस्सुमन्तुरमितद्युति:।
शिष्यमध्यापयामास कबन्धं सोऽपि तं द्विधा।
कृत्वा तु देवदर्शाय तथा पथ्याय दत्तवान‍्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अथर्ववेद की शिक्षा सर्वप्रथम महाप्रतापी ऋषि सुमन्तु ने अपने शिष्य कबन्ध को दी थी। तत्पश्चात् कबन्ध ने उसे दो भागों में विभाजित करके देवदर्श और पथ्य नामक अपने शिष्यों को प्रदान किया।
 
The Atharvaveda was first taught by the immensely illustrious sage Sumantu to his disciple Kabandha. Then Kabandha divided it into two parts and gave them to his disciples named Devadarsha and Pathya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)