श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 6: सामवेदकी शाखा, अठारह पुराण और चौदह विद्याओंके विभागका वर्णन  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  3.6.29-30 
आयुर्वेदो धनुर्वेदो गान्धर्वश्चैव ते त्रय:।
अर्थशास्त्रं चतुर्थं तु विद्या ह्यष्टादशैव ता:॥ २९॥
ज्ञेया ब्रह्मर्षय: पूर्वं तेभ्यो देवर्षय: पुन:।
राजर्षय: पुनस्तेभ्य ऋषिप्रकृतयस्त्रय:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
आयुर्वेद, धनुर्वेद और गंधर्व तथा चतुर्थ अर्थशास्त्र को मिलाकर कुल अठारह विद्याएँ होती हैं। ऋषि तीन प्रकार के होते हैं- पहले ब्रह्मर्षि, दूसरे देवर्षि और फिर राजर्षि। 29-30॥
 
By adding Ayurveda, Dhanurveda and Gandharva and the fourth Arthashastra, there are a total of eighteen Vidyas. There are three types of sages – first Brahmarshi, second Devarshi and then Rajarshi. 29-30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)