श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.5.8 
अथाह याज्ञवल्क्यस्तु किमेभिर्भगवन्द्विजै:।
क्लेशितैरल्पतेजोभिश्चरिष्येऽहमिदं व्रतम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तब याज्ञवल्क्य बोले, "भगवन! ये सभी ब्राह्मण अत्यंत दुर्बल हैं, इन्हें कष्ट देने की क्या आवश्यकता है? मैं अकेला ही इस व्रत को करूंगा।"
 
Then Yagyavalkya said, "Lord! All these Brahmins are very weak, what is the need to trouble them? I alone will perform this fast."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)