श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.5.5 
पूर्वमेवं मुनिगणैस्समयो य: कृतो द्विज।
वैशम्पायन एकस्तु तं व्यतिक्रान्तवांस्तदा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज पुरुष! इस प्रकार ऋषियों ने जो समय पहले निश्चित किया था, उसे एक वैशम्पायन ने ही पार कर लिया ॥5॥
 
O twice born person, in this manner the time which had been fixed earlier by the sages was exceeded by just one Vaishmpayana. ॥5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)