श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.5.4 
ऋषिर्योऽद्य महामेरो: समाजे नागमिष्यति।
तस्य वै सप्तरात्रात्तु ब्रह्महत्या भविष्यति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
[एक बार सब ऋषियों ने मिलकर नियम बनाया कि] जो कोई महामेरु स्थित हमारी सभा में सम्मिलित नहीं होगा, उस पर सात रात्रि के भीतर ब्राह्मण हत्या का पाप लगेगा ॥4॥
 
[Once all the sages together made a rule that] whoever does not join our gathering situated at Mahameru will be charged with the murder of a brahmin within seven nights. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)