श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.5.30 
शाखाभेदास्तु तेषां वै दश पञ्च च वाजिनाम्।
काण्वाद्यास्सुमहाभाग याज्ञवल्क्या: प्रकीर्तिता:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! उन वाजिश्रुतियों की कण्व आदि पंद्रह शाखाएँ हैं; वे सब शाखाएँ महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा प्रवर्तित कही गई हैं।
 
O great man! Those Vajishrutis have fifteen branches like Kanva etc.; all those branches are said to have been propagated by Maharishi Yagyavalkya. 30.
 
इति श्रीविष्णुपुराणे तृतीयेंऽशे पञ्चमोऽध्याय:॥ ५॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)