श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.5.10 
निस्तेजसो वदस्येनान्यत्त्वं ब्राह्मणपुङ्गवान‍्।
तेन शिष्येण नार्थोऽस्ति ममाज्ञाभङ्गकारिणा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तुम इन सभी महान ब्राह्मणों को मूर्ख कहते हो। मुझे तुम जैसे अवज्ञाकारी शिष्य से कोई प्रयोजन नहीं।
 
You call all these great Brahmins dull. I have no use for a disobedient disciple like you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)