श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 4: ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.4.23 
संहितात्रितयं चक्रे शाकपूर्णस्तथेतर:।
निरुक्तमकरोत्तद्वच्चतुर्थं मुनिसत्तम॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे मुनिसत्म! इनके दूसरे शिष्य शाकपूर्ण ने तीन वेद और चौथा निरुक्त ग्रन्थ रचा था। 23॥
 
Hey Munisatam! His second disciple, Shakapurna, composed three Vedas and the fourth, a Nirukta book. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)