श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 4: ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.4.22 
तस्य शिष्यास्तु ये पञ्च तेषां नामानि मे शृणु।
मुद‍्गलो गोमुखश्चैव वात्स्यश्शालीय एव च।
शरीर: पञ्चमश्चासीन्मैत्रेय सुमहामति:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उनके पांच शिष्यों के नाम सुनिए. हे मैत्रेय! वे थे मुद्गल, गोमुख, वत्स्य और शालिया और पांचवें थे महामती शरीर।
 
Listen to the names of his five disciples. O Maitreya! They were Mudgal, Gomukh, Vatsya and Shaliya and the fifth was Mahamati Sharir.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)