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vishnu 3.4.2: तदनन्तर अट्ठाईसवें द्वापरयुग में मेरे पुत्र कृष्णद्वैपायन ने इसी चतुष्पद वेद को चार भागों में विभाजित किया। 2॥   |   vishnu अध्याय 3.4: ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार   ।   vishnu अंश 3: तृतीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 4: ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.4.2 
ततोऽत्र मत्सुतो व्यासो अष्टाविंशतिमेऽन्तरे।
वेदमेकं चतुष्पादं चतुर्धा व्यभजत्प्रभु:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर अट्ठाईसवें द्वापरयुग में मेरे पुत्र कृष्णद्वैपायन ने इसी चतुष्पद वेद को चार भागों में विभाजित किया। 2॥
 
Subsequently, in the twenty-eighth Dvaparayuga, my son Krishnadvaipayana divided this same Veda consisting of Chatushpada into four parts. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)