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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 4: ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार
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श्लोक 17
श्लोक
3.4.17
चतुर्धा स बिभेदाथ बाष्कलोऽपि च संहिताम्।
बोध्यादिभ्यो ददौ ताश्च शिष्येभ्यस्स महामुनि:॥ १७॥
अनुवाद
तब बाष्कल ने भी अपनी शाखा को चार भागों में विभाजित करके बोध्य आदि अपने शिष्यों को दे दिया॥17॥
Then Bashkala also divided his branch into four parts and gave them to his disciples like Bodhya etc.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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