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vishnu 3.4.10: इनके अतिरिक्त महामुनि व्यास जी ने सूत जाति के महाज्ञानी रोमहर्षण को भी अपना इतिहास और पुराणों का विद्यार्थी स्वीकार किया था ॥10॥   |   vishnu अध्याय 3.4: ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार   ।   vishnu अंश 3: तृतीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 4: ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.4.10 
रोमहर्षणनामानं महाबुद्धिं महामुनि:।
सूतं जग्राह शिष्यं स इतिहासपुराणयो:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इनके अतिरिक्त महामुनि व्यास जी ने सूत जाति के महाज्ञानी रोमहर्षण को भी अपना इतिहास और पुराणों का विद्यार्थी स्वीकार किया था ॥10॥
 
Apart from these, Mahamuni Vyas ji accepted the Suta caste great intelligent Romharshan as a student of his history and Puranas. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)