श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.2.7 
वाजिरूपधर: सोऽथ तस्यां देवावथाश्विनौ।
जनयामास रेवन्तं रेतसोऽन्ते च भास्कर:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इसलिए उन्होंने भी घोड़े का रूप धारण कर दो अश्विनों को जन्म दिया और रेत के स्राव के तुरंत बाद उन्होंने रेवंत को जन्म दिया।
 
Therefore he too took the form of a horse and produced two Ashvins and immediately after the secretion of sand he produced Revant.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)