श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  3.2.62 
मन्वन्तराण्यशेषाणि कथितानि मया तव।
मन्वन्तराधिपांश्चैव किमन्यत्कथयामि ते॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
मैंने तुमसे सम्पूर्ण मन्वन्तरों और मन्वन्तराधिकारियों का वर्णन किया है। कहो, अब मैं तुमसे और क्या कहूँ?॥ 62॥
 
I have described to you all the Manvantaras and the Manvantaradhikaris. Tell me, what else should I tell you?॥ 62॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे तृतीयेंऽशे द्वितीयोऽध्याय:॥ २॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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