vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन
»
श्लोक 55
श्लोक
3.2.55
चतुर्युगेऽप्यसौ विष्णु: स्थितिव्यापारलक्षण:।
युगव्यवस्थां कुरुते यथा मैत्रेय तच्छृणु॥ ५५॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! पालनकर्ता भगवान विष्णु किस प्रकार चारों युगों का संचालन करते हैं, यह सुनो -॥ 55॥
O Maitreya! Listen to the way the sustaining Lord Vishnu manages the four yugas -॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×