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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 2: सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन
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श्लोक 54
श्लोक
3.2.54
मनवो भूभुजस्सेन्द्रा देवास्सप्तर्षयस्तथा।
सात्त्विकोंऽश: स्थितिकरो जगतो द्विजसत्तम॥ ५४॥
अनुवाद
हे द्विजश्रेष्ठ! मनु, मनु के पुत्र, राजा, इन्द्र और सप्तर्षि - ये सब जगत् के पालनकर्ता भगवान् के सात्विक अंश हैं॥54॥
O best of the two! Manu, Manu's sons, the kings, Lord Indra and the seven sages - all these are satvik parts of the Lord who maintains the world. 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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