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vishnu 3.18.73: तब काशी की राजकुमारी अपनी दिव्य दृष्टि से यह जानकर कि वह अगले जन्म में सियार बनेगा, उसे देखने के लिए कोलाहल पर्वत पर गई।   |   vishnu अध्याय 3.18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा   ।   vishnu अंश 3: तृतीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  3.18.73 
सापि द्वितीये सम्प्राप्ते वीक्ष्य दिव्येन चक्षुषा।
ज्ञात्वा शृगालं तं द्रष्टुं ययौ कोलाहलं गिरिम्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
तब काशी की राजकुमारी अपनी दिव्य दृष्टि से यह जानकर कि वह अगले जन्म में सियार बनेगा, उसे देखने के लिए कोलाहल पर्वत पर गई।
 
Then the princess of Kashi, knowing by her divine sight that he had become a jackal in his next birth, went to the Kolahal mountain to see him. 73.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)