vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा
»
श्लोक 72
श्लोक
3.18.72
निर्विण्णचित्तस्स ततो निर्गम्य नगराद्बहि:।
मरुत्प्रपतनं कृत्वा शार्गालीं योनिमागत:॥ ७२॥
अनुवाद
वह अत्यन्त दुःखी मन से नगर से बाहर चला गया और प्राण त्याग दिए और पुनः गीदड़ के रूप में जन्म लिया। 72.
With a very sad mind he went out of the city and gave up his life and was again born as a jackal. 72.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×