श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  3.18.72 
निर्विण्णचित्तस्स ततो निर्गम्य नगराद‍्बहि:।
मरुत्प्रपतनं कृत्वा शार्गालीं योनिमागत:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
वह अत्यन्त दुःखी मन से नगर से बाहर चला गया और प्राण त्याग दिए और पुनः गीदड़ के रूप में जन्म लिया। 72.
 
With a very sad mind he went out of the city and gave up his life and was again born as a jackal. 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)