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vishnu 3.18.5: मायामोह ने कहा, "यदि तुम सब मोक्ष चाहते हो, तो जैसा मैं कहता हूँ वैसा ही करो। तुम सब इस धर्म का सम्मान करो, क्योंकि यह मोक्ष का द्वार है।" ॥5॥   |   vishnu अध्याय 3.18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा   ।   vishnu अंश 3: तृतीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.18.5 
मायामोह उवाच
कुरुध्वं मम वाक्यानि यदि मुक्तिमभीप्सथ।
अर्हध्वमेनं धर्मं च मुक्तिद्वारमसंवृतम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मायामोह ने कहा, "यदि तुम सब मोक्ष चाहते हो, तो जैसा मैं कहता हूँ वैसा ही करो। तुम सब इस धर्म का सम्मान करो, क्योंकि यह मोक्ष का द्वार है।" ॥5॥
 
Maya-moha said, "If you all desire salvation, then do as I say. You all should respect this religion as the open door to salvation." ॥5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)