श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 18: मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.18.39 
नित्यानां कर्मणां विप्र तस्य हानिरहर्निशम्।
अकुर्वन्विहितं कर्म शक्त: पतति तद्दिने॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! जो पुरुष सामर्थ्य होते हुए भी नियत कर्मों का पालन नहीं करता, वह उसी दिन पापी हो जाता है और उसी एक दिन-रात में उसके समस्त दैनिक कर्म नष्ट हो जाते हैं॥39॥
 
O Brahmin! One who, despite having the capability, does not perform the prescribed duties, becomes sinful on that very day and in that one day and night all his daily rituals get wasted. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)