नक्ताहृतमनुच्छिन्नं तृप्यते न च यत्र गौ:।
दुर्गन्धि फेनिलं चाम्बु श्राद्धयोग्यं न पार्थिव॥ १०॥
अनुवाद
हे राजन! रात्रि में लाया गया जल, अपवित्र जलाशय से, ऐसे गड्ढे से जिसमें गाय तृप्त न हो सके, अथवा दुर्गन्धयुक्त या झागयुक्त जल श्राद्ध के लिए उपयुक्त नहीं है।॥10॥
O King! The water brought at night, from an unconsecrated reservoir, from a pit in which a cow cannot be satiated, or from a foul-smelling or foamy water is not fit for Shraddha.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)